Tuesday, 9 January 2018

bhag 12 vitt,sampatti

Sanvidhan Ko Jane भाग XII: वित्त, सम्‍पत्ति, संविदाएं और वाद अध्‍याय I. वित्त 269. संघ द्वारा उद्गृहीत और संगृहीत किंतु राज्यों को सौंपे जाने वाले कर-- 2[(1) माल के क्रय या विक्रय पर कर और माल के परेषण पर कर, भारत सरकार द्वारा उद्गृहीत और संगृहीत किए जाएँगे किन्तु खंड (2) में उपबंधित रीति से राज्यों को 1 अप्रैल, 1996 को या उसके पश्चात्‌ सौंप दिए जाएँगे या सौंप दिए गए समझे जाएँगे। स्पष्टीकरण --इस खंड के प्रयोजनों के लिए-- (क) ''माल के क्रय या विक्रय पर कर'' पद से समाचारपत्रों से भिन्न माल के क्रय या विक्रय पर उस दशा में कर अभिप्रेत है जिसमें ऐसा क्रय या विक्रय अंतरराज्यिक व्यापार या वाणिज्य के दौरान होता है ; (ख) ''माल के परेषण पर कर'' पद से माल के परेषण पर (चाहे प्रेषण उसके करने वाले व्यक्ति को या किसी अन्य व्यक्ति को किया गया हो) उस दशा में कर अभिप्रेत है जिसमें ऐसा प्रेषण अंतरराज्यिक व्यापार या वाणिज्य के दौरान होता है। (2) किसी वित्तीय वर्ष में किसी ऐसे कर के शुद्ध आगम वहाँ तक के सिवाय, जहाँ तक वे आगम संघ राज्यक्षेत्रों से प्राप्त हुए आगम माने जा सकते हैं, भारत की संचित निधि के भाग नहीं होंगे, किंतु उन राज्यों को सौंप दिए जाएँगे जिनके भीतर वह कर उस वर्ष में उद्ग्रहणीय हैं और वितरण के ऐसे सिद्धांतों के अनुसार, जो संसद विधि द्वारा बनाए, उन राज्यों के बीच वितरित किए जाएँगे। 3[(3) संसद, यह अवधारित करने के लिए कि 4[माल का क्रय या विक्रय या प्रेषण] कब अंतरराज्यिक व्यापार या वाणिज्य के दौरान होता है, विधि द्वारा सिद्धांत बना सकेगी। 5[270.उद्‍गृहीत कर और उनका संघ तथा राज्यों के बीच वितरण--(1) क्रमशः 6[अनुच्छेद 268 और अनुच्छेद 269] में निर्दिष्ट शुल्कों और करों के सिवाय, संघ सूची में निर्दिष्ट सभी कर और शुल्क; अनुच्छेद 271 में निर्दिष्ट करों और शुल्कों पर अधिभार और संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए उद्‍गृहीत कोई उपकर भारत सरकार द्वारा उद्‍गृहीत और संगृहीत किए जाएँगे तथा खंड (2) में उपबंधित रीति से संघ और राज्यों के बीच वितरित किए जाएँगे। (2) किसी वित्तीय वर्ष में किसी ऐसे कर या शुल्क के शुद्ध आगमों का ऐसा प्रतिशत, जो विहित किया जाए, भारत की संचित निधि का भाग नहीं होगा, किन्तु उन राज्यों को सौंप दिया जाएगा जिनके भीतर वह कर या शुल्क उस वर्ष में उद्ग्रहणीय है और ऐसी रीति से और ऐसे समय से, जो खंड (3) में उपबंधित रीति से विहित किया जाए, उन राज्यों के बीच वितरित किया जाएगा। (3) इस अनुच्छेद में, ''विहित'' से अभिप्रेत है-- (i) जब तक वित्त आयोग का गठन नहीं किया जाता है तब तक राष्ट्रपति द्वारा आदेश द्वारा विहित; और (ii) वित्त आयोग का गठन किए जाने के पश्चात्‌ वित्त आयोग की सिफारिशों पर विचार करने के पश्चात्‌ राष्ट्रपति द्वारा आदेश द्वारा विहित। 271. कुछ शुल्कों और करों पर संघ के प्रयोजनों के लिए अधिभार-- अनुच्छेद 269 और अनुच्छेद 270 में किसी बात के होते हुए भी, संसद उन अनुच्छेदों में निर्दिष्ट शुल्कों या करों में से किसी में किसी भी समय संघ के प्रयोजनों के लिए अधिभार द्वारा वृद्धि कर सकेगी और किसी ऐसे अधिभार के संपूर्ण आगम भारत की संचित निधि के भाग होंगे। 272. [कर जो संघ द्वारा उद्‍गृहीत और संगृहीत किए जाते हैं तथा जो संघ और राज्यों के बीच वितरित किए जा सकेंगे -- संविधान (अस्सीवाँ संशोधन) अधिनियम, 2000 की धारा 4 द्वारा लोप किया गया। 273. जूट पर और जूट उत्पादों पर निर्यात शुल्क के स्थान पर अनुदान-- (1) जूट पर और जूट उत्पादों पर निर्यात शुल्क के प्रत्येक वर्ष के शुद्ध आगम का कोई भाग असम, बिहार, उड़ीसा और पश्चिमी बंगाल राज्यों को सौंप दिए जाने के स्थान पर उन राज्यों के राजस्व में सहायता अनुदान के रूप में प्रत्येक वर्ष भारत की संचित निधि पर ऐसी राशियाँ भारित की जाएँगी जो विहित की जाएँ। (2) जूट पर और जूट उत्पादों पर जब तक भारत सरकार कोई निर्यात शुल्क उद्‍गृहीत करती रहती है तब तक या इस संविधान के प्रारंभ से दस वर्ष की समाप्ति तक, इन दोनों में से जो भी पहले हो, इस प्रकार विहित राशियाँ भारत की संचित निधि पर भारित बनी रहेंगी। (3) इस अनुच्छेद में, ''विहित'' पद का वही अर्थ है जो अनुच्छेद 270 में है। 274. ऐसे कराधान पर जिसमें राज्य हितबद्ध है, प्रभाव डालने वाले विधेयकों के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश की अपेक्षा-- (1) कोई विधेयक या संशोधन, जो ऐसा कर या शुल्क, जिसमें राज्य हितबद्ध है, अधिरोपित करता है या उसमें परिवर्तन करता है अथवा जो भारतीय आय-कर से संबंधित अधिनियमितियों के प्रयोजनों के लिए परिभाषित ''कृषि-आय'' पद के अर्थ में परिवर्तन करता है अथवा जो उन सिद्धांतों को प्रभावित करता है जिनसे इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी उपबंध के अधीन राज्यों को धनराशियाँ वितरणीय हैं या हो सकेंगी अथवा जो संघ के प्रयोजनों के लिए कोई ऐसा अधिभार अधिरोपित करता है जो इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों में वर्णित है, संसद के किसी सदन में राष्ट्रपति की सिफारिश पर ही पुरःस्थापित या प्रस्तावित किया जाएगा, अन्यथा नहीं। (2) इस अनुच्छेद में, ''ऐसा कर या शुल्क, जिसमें राज्य हितबद्ध हैं'' पद से ऐसा कोई कर या शुल्क अभिप्रेत है-- (क) जिसके शुद्ध आगम पूर्णतः या भागतः किसी राज्य को सौंप दिए जाते हैं, या (ख) जिसके शुद्ध आगम के प्रति निर्देश से भारत की संचित निधि में से किसी राज्य को राशियाँ तत्समय संदेय हैं।

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