Friday, 12 January 2018

 भ्रूण हत्या पर रोकथाम

परिचय


भ्रूण का लिंग जाँचः-

 

भारत सरकार ने कन्या भ्रूण हत्या पर रोकथाम के उद्देश्य से प्रसव पूर्व निदान तकनीक के लिए 1994 में एक अधिनियम बनाया। इस अधिनियम के अनुसार भ्रूण हत्या व लिंग अनुपात के बढ़ते ग्राफ को कम करने के लिए कुछ नियम लागू किए हैं, जो कि निम्न अनुसार हैं:

 

-गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग की जाँच करना या करवाना। 

 

- शब्दों या इशारों से गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग के बारे में बताना या मालूम करना। 

 

- गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग की जाँच कराने का विज्ञापन देना।

 

- गर्भवती महिला को उसके गर्भ में पल रहे बच्चें के लिंग के बारे में जानने के लिए उकसाना गैर कानूनी है।

 

-कोई भी व्यक्ति रजिस्टे्रशन करवाएँ बिना प्रसव पूर्व निदान तकनीक(पी.एन.डी.टी.) अर्थात अल्ट्रासाउंड इत्यादि मशीनों का प्रयोग नहीं कर सकता। 

 

-जाँच केंद्र के मुख्य स्थान पर यह लिखवाना अनिवार्य है कि यहाँ पर भ्रूण के लिंग (सैक्स) की जाँच नहीं की जाती, यह कानूनी अपराध है।

 

-कोई भी व्यक्ति  अपने घर पर भ्रूण के लिंग की जाँच के लिए किसी भी तकनीक का प्रयोग नहीं करेगा व इसके साथ ही कोई व्यक्ति  लिंग जाँचने के लिए मशीनों का प्रयोग नहीं करेगा।

 

- गर्भवती महिला को उसके परिजनों या अन्य द्वारा लिंग जाँचने के लिए प्रेरित करना आदि भू्रण हत्या को बढ़ावा देने वाली अनेक बातें इस एक्ट में शामिल की गई हैं। 

 

-उक्त अधिनियम के तहत पहली बार पकड़े जाने पर तीन वर्ष की कैद व पचास हजार रूपये तक का जुर्माना हो सकता है।

 

- दूसरी बार पकड़े जाने पर पाँच वर्ष कैद  व एक लाख रूपये का जुर्माना हो सकता है।

 

लिंग जाँच करने वाले क्लीनिक का रजिस्टे्रशन रद कर दिया जाता है।

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