Thursday, 11 January 2018

gair jamanati aparadh me agrim jamanat

Aaj Ka Vishay गैर-जमानती अपराध में अग्रिम जमानत- * अगर किसी व्यक्ति को यह विश्वास है कि उसे किसी गैर-जमानती अपराध के अभियोग में गिरफ्तार किया जा सकता है, तो वह इस धारा के अधीन निर्देश के लिए उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय को आवेदन कर सकता है। यदि न्यायालय ठीक समझे तो ऐसी गिरफ्तारी की स्थति में उसे जमानत पर छोड़ा जा सकता है । अग्रिम जमानत देने की शर्तें- * वह व्यक्ति पुलिस अधिकारी द्वारा पूछे जाने वाले प्रति प्रश्नों का उत्तर देने के लिए जब भी जरुरत होगी, वह उपलब्ध होगा। * वह उस मामले के तथ्यों से अवगत किसी व्यक्ति को न्यायालाय या किसी पुलिस अधिकारी के समक्ष ऐसे तथ्यों को प्रकट ना करने के लिए मनाने के लिए, प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष रुप से उसे कोई * उत्प्रेरणा, मकी या वचन नहीं देगा। * वह व्यक्ति ऩ्यायालय की पूर्व अनुज्ञा के बिना भारत नहीं छोड़ेगा। * ऐसी अन्य शर्तें, जो धारा 437 की उपधारा (3) के अधीन ऐसे अधिरोपित की जा सकती हैं मानो उस धारा के अधीन जमानत मंजूर की गयी है । * ऐसे अभियोग पर पुलिस थाने में पुलिस अधिकारी द्वारा वारंट के बिना गिरफ्तारी के समय या जब वह ऐसे अधिकारी की अभिरक्षा में है, तब किसी समय जमानत देने के लिए तैयार है, तो उसे जमानत पर छोड़ दिया जायेगा। यदि ऐसे अपराध का संज्ञान करने वाला मजिस्ट्रेट यह विनिश्चय करता है कि उस व्यक्ति के विरुद्ध प्रथम बार ही वारंट जारी किया जाना चाहिए तो वह उपधारा (क) के अधीन न्यायालय के निर्देश के अनुरुप जमानती वारंट जारी करेगा। अदालत मुकदमों के विभिन्न पहलुओं को देखते हुए शर्तों या बिना शर्त के अग्रिम जमानत मंजूर या नामंजूर कर सकती है।

No comments:

पोक्सो (POCSO)

चर्चा का कारण हाल ही में राज्यसभा ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2019 {POCSO (Amendment) Bill, 2019} को मंजूरी प्रदान ...