Friday, 12 January 2018

पंचायत राज अधिनियम 2006 के धारा

पंचायत राज अधिनियम 2006 के धारा

विषय वस्तु:  ग्राम कचहरी में क्रिमनल मामलों का दायर किया जाना एवं ट्रायल ( पंचायत राज अधिनियम 2006 के धारा 101, 102, 103, 104, एवं 105 तथा ग्राम कचहरी संचालन नियमावली 2007 का नियम 32-40)

 

धारा 101    फौजदारी वाद या मामला को दायर करना और उसकी सुनवाई। ( नोट उक्त धारा के बारे में आपलोगों की प्रथम दिन ही 2 बजे अपराह्न से 4 बजे उपराह्न के बीच विस्तृत रूप से जानकारी दी गई है।

 

धारा 102    नोट इसके बारे प्रथम दिन जानकारी दी गई है।

 

धारा 103    नोट इसके बारे में प्रथम दि नही जानकारी

 

धारा 104    नोट इसके बारे में भी आपलोगों को प्रथम दिन 2 बजे से 4 बजे के बीच विस्तृत से व्याख्या की गयी है।

 

धारा 105    निर्णय का रूप-ग्राम कचहरी की किसी न्यायपीठ का निर्णय लिखित रूप में होगा और उस पर न्यायपीठ के सभी सदस्यों का हस्ताक्षर होगा। उसमें इस निमित सरकार द्वारा बनाये गये नियमों द्वारा यथाविहित विशिष्टयाँ अन्तर्विष्ट होगी:

 

            परन्तु न्यायपीठ के किसी सदस्य द्वारा निर्णय पर हस्ताक्षर नहीं करने की विधि मनयता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

 

नियम: 32   अधिनियम धारा 106 के अध्याधीन दायर किया जाने वाला कई मामला सरपंच के पास लिखकर दायर किया जाएगा और जहाँ सरपंच की सेवाएँ उपलब्ध न हो वहाँ उप-सरपंच के समक्ष दायर किया जायेगा।

 

नियम 33    नियम 32 के अधीन अर्जी देने के समय कोई व्याक्ति ग्राम -कचहरी के सचिव के पास एक सौ रूपये की नकद फीस जमा करेगा।

 

नियम 34 :-  यदि अर्जी लिखित रूप से दी गई हो तो यथा स्थिति सरपंच अर्जीदार की शपथ दिलाकर उसका परीक्षण अविलम्ब करेगा और शपथ लेकर निष्ठापूर्वक वह अपने बयान में कुछ कहेगा उसका सारांश-लिखित रूप में अर्जी की पीठ पर दर्ज कर दिया जायेगा जो ऐसे मुकदमें के लिए खोला जाय परन्तु दोनों में से किसी स्थिति मैं शपथ लेकर या निष्ठापूर्वक अर्जीदार ने जो ब्यान दिया हो उसे पढ़कर सुनाए जाने और समझा जाने के बाद वह उस ब्यान के नीचे अपना हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान लगा देगा।

 

नियम 35 :-  यदि नियम 32 के अधीन अर्जीदार द्वारा शपथ लेकर या निष्ठापूर्वक किए गए ब्यान पर सरपंच की यह राय हो कि (क) उस बयान से किसी अपराध का पता नही चलता है अथवा अगर अपराध का पता भी चलता है तो ऐसे अपराध का जो ग्राम कचहरी की न्यायपीठ के क्षेत्राधिकार के बाहर हो तो ऐसी अर्जी को वह तुरंत खारिज कर देगा और अर्जीदार को अपने आदेश की सूचना तुरंत दे देगा। (ख) यदि अर्जीदार द्वारा दिये गये बयान से ऐसा अपराध का होना मालूम पड़े जो ग्राम कचहरी के न्यायपीठ द्वारा संज्ञेय (Cognizable) है तो अपराध का संज्ञान (कांग्निजेंस) लेगा और उसके बाद सबसे पहले वह मुद्दालय के नाम सम्मन जारी करेगा जिसमें यह बताया रहेगा कि उस पर किस अपराध का आरोप बनता है या लगाया गया है उस सम्मन में दर्शा गयी तारीख एवं नियत समय पर ग्राम कचहरी की न्यायपीठ के समक्ष उपस्थित रहेगा यदि उक्त नियम समय तारीख तक सम्मन तामिल न हो तो उसे फिर मानय कर दिया जायेगा।

 

नियम 36 :-  ग्राम कचहरी नयायपीठ द्वारा विचारण किए जाने वाले सभी प्रकार के फौजीदारी मामलों में ग्राम कचहरी न्यायपीठ किसी अभियुक्त की उपस्थिति उसी विहित रीति से सुनिश्चित करायेगी जैसा कि नियम 13 में निर्धारित है।

 

नियम 37 :-  जब मुदालय ग्राम कचहरी के समक्ष हाजिर होगा या अन्य विहित रीति से हाजिर किया जायेगा तो मुद्दालय अपने ऊपर लगाये गये अपराधों के संबंध में अपनी इच्छानुसार बयान न्यायपीठ के समक्ष देगा।

 

नियम 38 :-  यदि धारा 102 की अपेक्षानुसार ग्राम कचहरी के न्यायपीठ दोने पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण समझौता कराने में असफल हो जाय और मुद्दालय कोई बयान दिया हो तो उसे लिख लिया जायेगा। अगर मुद्दालय अपने ऊपर अपराध न्यायपीठ के द्वारा संज्ञेय है तो न्यायपीठ इस अपराध के अनुसार अपना निर्णय लिखित करेगी और न्यायपीठ के सदस्यों के बीच असहमति होने पर बहुमत का निर्णय ही मान्य होगा।

 

नियम 39 :-

 

(i)         यदि पूर्वगामी नियम के अनुसार न्यायपीठ मुदालय को सजा न दे या मुदालय अपना अपराध कबूल न करे

तो न्यायपीठ मुदई की बातों की सुनवाई कर देगी और मुकदमें में जो कुछ भी साक्ष्य पेश करेगा उसे ले लेने के बाद न्यायपीठ मुदालय की सूनवाई करेगी तथा मुदालय अपनी सफाई मैं जो कुछ भी कहेगा प्रमाण पेश करेगा। उसे न्यायपीठ मुद्दालय के प्राप्त कर लेगा।

(ii)        यदि न्यायपीठ ठीक समझे तो मुदई या मुदालय के आवेदन करने पर किसी गवाह का नाम इस आशय का सम्मन में बताई तारीख को ग्राम कचहरी में हाजिर हो और यदि कोई प्रमाण कागजात या और अन्य चीज हो तिो उसे न्यायपीठ के समक्ष प्रस्तुत करें।

(iii)       इस तरह के आवेदन पर किसी गवाह पर सम्मन करने के पूर्व न्यायपीठ यह आपेक्षा करेगी कि प्रति सम्मन दो (2) रूपये की दर से तलवाना-शुल्क (प्रोसेस-फीस) जमा कर करवाा ले।

नियम 40 :-

(i)         नियम 39 में बताये गये साक्ष्य प्राप्त करने के बाद या न्यायपीठ अपनी इच्छानुसार जो कुछ भी साक्ष्य पक्षों से लेना चाहती हो, उसे लेने के बाद और मुदालय की जाँच कर लेने के बाद न्यायपीठ अगर इस निष्कर्ष पर पहुँचती है कि मुदालय दोषी नहीं तो वह धारा 103 की रीति से अपना निर्णय लिखित करेगी।

 

(ii)        यदि न्यायपीठ मुदालय को दोषी पाएगी तो वह उससे सिध्द दोष करार देगी और अधिनियम की धारा 107 के अध्याधीन अपराध की विधि सम्मत उसे सजा देगी, लेकिन ग्राम कचहरी की कोई पीठ, साधारण अथवा सख्त किसी कारावास की सजा नहीं देगी। उपराधी को ऐसे उपराध के लिए जुर्माना कर सकती है जिसकी की जुर्माना राशि एक हजार से अधिक नहीं होगी।

 

दूसरा दिन: 2 अपराह्न से 3 अपराह्न

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