Sunday, 7 January 2018

prachin bharat

प्राचीन भारत >> वैदिक साहित्य : 1394. ऋग्वेद :- -श्रुति साहित्य में वेदों का प्रथम स्थान है। वेद शब्द ‘विद’ घातु से बना है , जिसका अर्थ है ‘जानना’ -वेदों से आर्यों के जीवन तथा दर्शन का पता चलता है । -वेदों की संख्या चार है। ये हैं- ऋग्वेद, यजुर्वेद, समावेद और अर्थवेद । -वेदों को संहिता भी कहा जाता है। -वेदों के संकलन का श्रेय महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेद-व्यास को है । -ऋग्वेद में 10 मण्डलों में विभाजित है। इसमें देवताओं की स्तुति में 1028 श्लोक हैं। जिसमें 11 बालखिल्य श्लोक हैं । -ऋग्वेद में 10462 मंत्रों का संकलन है। -प्रसिद्ध गायत्री मंत्र ऋग्वेद के चौथे मंडल से लिया गया है। -ऋग्वेद का पहला ताथा 10वां मंडल क्षेपक माना जाता है । -नौवें मंडल में सोम की चर्चा है। -आठवें मंडल में हस्तलिखित ऋचाओं को खिल्य कहा जाता है। -ऋग्वेद में पुरुष देवताओं की प्रधानता है । 33 देवताओं का उल्लेख है। -ऋग्वेद का पाठ करने वाल ब्राह्मण को होतृ कहा जाता था । -देवताओं में सबसे महत्वपूर्ण इंद्र थे । -ऋग्वेद में दसराज्ञ युद्ध की चर्चा है। -उपनिषदों की कुल संख्या 108 है। -वेदांग की संख्या 6 है। -महापुराणों की संख्या 18 है। -आर्यों का प्रसिद्ध कबीला भरत था ।ज -जंगल की देवी के रूप में अरण्यानी का उल्लेख ऋग्वेद में हुआ है। -बृहस्पति और उसकी पत्नी जुही की चर्चा भी ऋग्वेद में मिलती है। -सरस्वती ऋग्वेद में एक पवित्र नदी के रूप में उल्लिखित है। इसके प्रवाह-क्षेत्र को देवकृत योनि कहा गया है। -ऋग्वेद में धर्म शब्द का प्रयोग विधि(नियम) के रूप में किया गया है। -ऋग्वेद की पांच शाखाएं हैं- वाष्कल, शाकल, आश्वलायन, शंखायन और माण्डुक्य -अग्नि को पथिकृत अर्थात् पथ का निर्माता कहा जाता था ।

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