धारा-101 दिवानी वादों का दायर किया जाना एवं सुनवाई
इस अधिनियम के अधीन दायर किया जानेवाला मामला या वाद सरपंच के समक्ष ही दायर किया जायेगा और जहाँ सरपंच की सेवा उपलब्ध नहीं रहने पर उक्त किसी भी प्रकार का मामला या वाद उपसरपंच के समक्ष दायर किया जायेगा और उक्त मामला या वाद का सुनवाई ग्राम कचही के ऐसे न्यायपीठ के द्वारा सुन जायेगा जिसमें सरपंच द्वारा विहित रीति से चुना गया दो पंच, एवं पक्षकारों द्वारा नामित दो पंच जो कि ग्राम कचहरी के पंच होगें एवं सरपंच स्वयं भी होगे परन्तु-
(i) यदि कोई पक्षकर यथाविहित समय के भीतर किसी पंच का नाम नामित नहीं करते होत तो सरपंच या उनके अनुपस्थिति में उपसरपंच ग्राम कचहरी के पंचों में पंच नामित कर देगा।
(ii) यदि किसी वाद या मामला की कार्यवाहियों में, भाग लेने से सरपंच निवारित हो जाए तो उस सरपंच को अथवा यदि वह भी सरपंच की राय में उसी प्रकार निरहिंत हो, तो अपने बीच के पंचों द्वारा अन्य पंच का चुनाव किया जायेगा और यथास्थिति उप-सरपंच या इस प्रकार चुना गया, पंच उक्त वाद या मामले के प्रजोजनार्थ सरंपच के सभी कार्यों का निर्वहन करेगा।
(iii) यदि वाद या मामले के दायर होने के बाद किन्तु अवधारणा के पहले किसी समय सरपंच के सेवा उपलब्ध नही रहे और उप-सरपंच के नाम पक्षकारों द्वारा नामित कर दिया गया हो या धारा 100 के अधीन निवारित कर दिया गया हो तो ऐसी परिस्थिति में पंचो में सबसें वरिष्ठ पंच सरपंच कार्य करेगा और,
(iv) यदि वाद दायर किये जाने के बाद तथा अवधारण के पहले किसी समय पंच की सेवाएँ उपलब्ध नहीं अथवा कार्यवाहियों में भाग लेने से धारा 100 के तहत निवारित किया गया हों, विहित समय के भीतर, यथास्थिति संबंध पक्षकार द्वारा किसी दूसरे पंच का नाम निदेशन या सरपंच द्वारा उसका चयन किया जायेगा।
(ii) उपधारा (1) के अधीन किसी वाद या मामले की सुनवाई और अवधारणा करने के प्रयोजनार्थ तीन अन्य पंचों की पूर्ति होगी जिसमें सरपंच और संबंधित पक्षों द्वारा नामित दो पंच शामिल रहेंगें।
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