घारा-111
ग्राम कचहरी के न्यायपीठ नीचे लिखे गये वादों की सुनवाई नहीं करेगी- धारा 110 में अन्तर्विष्ट से किसी प्रतिकूल वाद के होते हुए भी कोई भी वाद ग्राम कचहरी की किसी न्यायपीठ के द्वारा स्वीकार नहीं किया जायेगा।
(क) साझेदारी लेखा, अतिशेष पर,
(ख) निर्वसीयतता के अधीन शेयर या शेयर के भाग के लिए वसीयत के अधीन वसीयत संपदा या संपदा के भाग के लिए, या
(ग) केन्द्र या राज्य सरकार या अपनी पदीय हैसियम से ऐसे सरकारी सेवकों द्वारा या उसके विरूद, या
(घ) नाबलिग या विकृत चित के व्यक्तियों द्वारा या उसके विरूध्द, या
(ड़) अचल सम्पत्ति के लगान के निर्धारण, वृद्धि कमी, उपशमन या प्रभाजन के लिए या
(च) पुरोबंध द्वारा बंधक लागू करने के लिए अचल सम्पति के बंधक का या बंधक के मोचन के लिए सम्पत्ति की बिक्री: या
(छ) अचल सम्पत्ति में अधिकार, टाइटील और हित की आवधारण के लिए,
(ज) किसी ऐसे मामले के सम्बन्ध में जिसमें इस अधिनियम के प्रवृत हाने के पूर्व समक्ष अधिकारिता वाले किसी न्यायालय में कार्यवाही लंबित हो, या
(झ) ग्राम पंचायत में मुखिया, या कार्यपालिका समिति के किसी सदस्य, सरपंच या पंच के विरूद्ध वाद आता हो।
विषय वस्तु:- ग्राम कचहरी के दिवानी मामलों का दायर किा जाना एवं ट्रायल ( ग्राम कचहरी संचालन नियामावली, 2007 का नियम 20-28 एवं ( बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 101, 102, 103, एवं 110)
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