धारा-107 ग्राम कचहरी की दाण्डिक अधिकार
ग्राम कचहरी की न्यापीठ ग्राम कचहरी की स्थानीय सीमाओं के भीतर किये गये अपराध या अपराधें के दुस्प्रेरण या प्रयासें के विचारण की अधिकारिता होगी जो कि-
(क) भारतीय दण्ड संहिता (45, 1860) के निम्नलिखित धाराओं के अन्तर्गत किये गये हों-
धारा- 140, 142, 143, 145, 147, 151, 153, 160, 172, 174, 178, 179, 269, 277, 283, 285, 286, 289, 290, 294, 294 (ए), 332, 334, 336, 341, 352, 356, 357, 374, 403, 426, 428, 430, 447, 448, 502, 5041, 506, एवं 510, के अन्तर्गत अपराध किये गयें हैं।
(नोट: उपर्युक्त धाराओं की विस्तृत जानकारी इस पुस्तक में आगे दी गई है।)
(ख) बंगाल लोक धुत अधिनियम, 1867 (बंगाल अधिनियम 2, 1867) के अधीन किया गया अपराध हो।
(ग) पशु-अतिचार अधिनियम, 1871(1,1871) की धारा 24 और 26 के अधीन किया गया अपराध हो।
(घ) अन्यथा उप बंधित को छोड़कर, इस अधिनियम या इसी के अधीन बनाये गये किसी नियम या उपविधि के अधीन किये गये अपराध हो।
(ड.) किसी अन्य अधिनियम के अधीन किया गया कोई अन्य अपराध, यदि सरकार द्वारा इसके वावद में शक्ति प्रदान की जाय;
परन्तु, ग्राम कचहरी किसी ऐसे अपराध का संज्ञान नहीं लेगी जिसकी बावत इस अधिनियम के प्रभाव में आने के पूर्व समक्ष अधिकारित वाले किसी न्यायालय कि समक्ष कोई कार्यवाही पूर्व से ही लंबित हो, परन्तु न्यायपीठ (बेंच) भारतीय दंड संहिता 1860 (45, 1860) की धारा 379, 380, 381, या 411 के अधीन किये गये किसी ऐसे अपराध का संज्ञान नहीं लेगा, जिसमें चुराई गई सम्पति की मूल्य दस हजार रूपये से अधिक का हो या जिसमें अभियुक्त की यदि-
(i) भारतीय दण्ड संहिता 1860, (45, 1860) के अध्याय XVII कि अधीन दण्डनीय अपराध के लिए पूर्व में तीन वर्षा या उससे अधिक अवधि का कारावास के लिए दोष सिध्द (दोषी) ठहराया गया हो, या,
(ii) ग्राम कचहरी की किसी न्यायपीठ के द्वारा चोरी के लिए पूर्व में जुर्माना किया गया हो, या
(iii) दण्ड प्रकिया संहिता 1973 (2, 1973) की धारा 109 या 110 के अधीन चलाई गई कार्यवाही में सद्वव्यवहार करने के लिए काराबध्द किया गया हो, या
(iv) ग्राम कचहरी न्यायपीठ ग्राम पंचायत के मुखिया , कार्यकारणी के सदस्य सरपंच पंच पर यदि मुकदमा दर्ज किया हो तो संज्ञान नहीं लेगा।
No comments:
Post a Comment