घारा-107 ग्राम कचहरी न्यायपीठ के दाण्डिक शक्तियाँ
(i) ग्राम कचहरी की न्यायपीठ पक्षों को सुनने के बाद एवं न्यायपीठ के समक्ष पेश किये गये साक्षों पर विचार करने के बाद अपना निर्णय अभिलिखित करेगी, दोष सिध्द हाने पर वह अपराधी को ऐसा जुर्माना से दण्डित करेगी जिसकी राशि एक हजार से ज्यादा का न हो। परन्तु, अगर मामले के विचारण के समक्ष पीठ यानी न्यायपीठ में उपस्थिति सदस्य समुदाय एक मत नहीं हो तो वैसे सदस्यों का बहुतम का निर्णय ग्राम कचहरी न्यायपीठ का निर्णय होगा। परन्तु आगे यह कि मामले के विचारण में न्यायपीठ में उपस्थिति सदस्यों के मतों की गणना बराबरी का हो जाय तो उस परिस्थिति में सरपंच अपना निर्णायक मत देगा तथा पीठ का उक्त निणर्य सरपंच के द्वितीय अथवा निर्णायक मत के अनुसार होगा।
(ii) ग्राम कचहरी की कोई पीठ, साधारण या सश्रम कारावास नहीं दे सकेगी, चाहे वह मूल दण्डादेश में हो या जुर्माना का भुगतान करने में व्यक्तिक्रम करने पर हो।
(iii) जब कोई न्यायपीठ धारा (1) के अधीन कोई जुर्माना अधिरोपित करती है वह आदेश पारित करते समय निर्देश दे सकती हैं कि वसुले गये जुर्माना का सम्पूर्ण अथवा अंश उस अपराध के कारण हुई हानि अथवा क्षति के प्रतिकर के भुगतान के लिए उपयोजित किया जायेगा।
(iv) जब किसी व्यक्ति को ग्राम कचहरी की किसी न्यायपीठ द्वारा सजा दी जाय, तब वह न्यायपीठ इस तरह दण्डादिस्ट व्यक्ति द्वारा लिखित या मौखिक रूप से अनुरोध किये जाने पर इस अधिनियम के अधीन अपील दायर करने की विहित अवधि के लिए ऐसी सजा के प्र्रवत्तान को स्थगित कर सकेगी। ग्राम कचहरी या उसकी न्यायपीठ द्वारा पारित आदेश की प्रति आदेश पारित किए जाने की तारीख से एक सप्ताह के भीतर, इस प्रयोजनार्थ विहित शीति से पक्षकारों को मुफ्त उपलब्ध कराई जायेगी।
No comments:
Post a Comment